उत्तर प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य क्या है (कत्थक कहा का शास्त्रीय नृत्य है।) कत्थक के कितने घराने है। कत्थक नृत्य के कलाकार ।
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उत्तर प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य
कत्थक
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| उत्तर प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य क्या है (कत्थक कहा का शास्त्रीय नृत्य है।) कत्थक के कितने घराने है। कत्थक नृत्य के कलाकार । |
उत्तर प्रदेश में शास्त्रीय नृत्य एक नाटक स्वरूप है।
कत्थक उत्तर प्रदेश का एक मात्र शास्त्रीय नृत्य है। जिसका प्रारंभ मंदिर के पुजारियों द्वारा तथा बांचते समय हाव-भाव के प्रदर्शन से माना जाता है। हिंदू शासकों के अलावा मुगल शासकों ने भी इस नृत्य को राज दरबार में आश्रय देना शुरू किया। वाजिद अली शाह ( अवध) के दरबार में इसका विशेष विकास हुआ।इस नृत्य का मुख्य केंद्र लखनऊ है। इस नृत्य का उन्नायक ठाकुर प्रसाद को माना जाता है। और कत्थक में ठुमरी गायन का प्रवेश बिंदादिन ने कराया।
•20वी शताब्दी में कत्थक के उत्थान में लीला सोखे (मेनका) का विशेष योगदान रहा।
• उत्तर प्रदेश में चार संस्थानों द्वारा कत्थक में स्नातक की डिग्री दी जाती है वह संस्थाएं हैं-बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, आगरा विश्वविद्यालय, भारतखंडे संगीत संस्थान (लखनऊ) व राष्ट्रीय कथक संस्थान (लखनऊ) लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध।
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कत्थक का उद्भव एवं स्वरूप-
कत्थक शब्द का उद्भव हिंदू रीति-रिवाज की कथाओं से हुआ है। जिसका शाब्दिक अर्थ है कहानी को प्रस्तुत करना या कहना। भूतकाल में कथावाचक अपनी कथाओं को गानों के रूप में बोलते थे। और अपनी कथा को एक नया रूप देने के लिए नृत्य करते थे। जिसे उत्तर भारत में कत्थक के रूप में जाना जाता है। तथा दक्षिण भारत में हरि कथा के नाम से जाना जाता है।
कथक नृत्य का स्वरूप 100 से अधिक घुंघुरूओं को पैरों में बांधकर तालबद्ध पदचाप, विहंगम चक्कर द्वारा पहचाना जाता है। और हिंदू धार्मिक कथाओं में प्रस्तुत किया जाता है। कत्थक का जन्म उत्तर में हुआ किंतु मुस्लिमों और पर्शियनो के प्रभाव से यह मंदिर की रीति से दरबारी मनोरंजन तक पहुंच गया।
कत्थक के प्रमुख घराने-
कत्थक नृत्य के प्रमुख कलाकार-
महत्वपूर्ण तथ्य-
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